ये
क्या हो रहा है, ये क्यों हो रहा है .
यह
क्या माजरा है, यह कैसी सबा है.
निगाहों
में उलझन, दिलों में धुआं है .
कुछ
ऐसी भी मुश्किल नहीं दास्ताँ है.
कई
अंजुमन हैं, कई रस्ते हैं .
न
जाने ये क्यों, फिर, समा बदगुमां है.
ये
किस मोढ़ पर आज, मेरा हिन्दोस्तां है.
यह
क्या माजरा है, यह कैसी सबा है.
यह मोदी की हवा है, य राहुल की सदा है.
मन
मोहन की दवा है, समझ में न आए ये
क्या सिलसिला है.
ये
सुषमा के नाले, लो अब तो जेटली भी
खफ़ा है.
औ, लोगों का क्या हाल हम तुमको बताएं.
उसी
उस ने लूटा, जिसको अवसर मिला.
जो
कुछ भि है, हिन्दोस्तां बदगुमाँ
है.
यह
क्या माजरा है, यह कैसी सबा है.
यह
स्कैम में हुकूमत य, फिर,हुकूमत में स्कैम है.
किस
किस क नाम हम तुमको गिनाएं, न इससे कोई भी अछूता
रहा है.
ये
यू पी औ एम पी, बंगला भी ए पी भी.
ये
सियासी दियारे, औ अफसर के दफ्टर भी.
चोरों
कि बजती है सारे में तूती.
जो
कुछ भी है, बस हिन्दोस्तां
बदगुमाँ है.
यह
क्या माजरा है, यह कैसी सबा है.
टी
वी दिखए सियासी तमाशे,
स्टूडियो
के माहिर इनक़लाबियों की जलवे.
रिटायर्ड
अफसरों के जवांमार्दी के क़िस्से.
जजों
की हिकायत, वकीलों की नसीहत.
इन
तमाशों से सुधरी, वतन की न हालत.
इसी सब से शायद वतन
बदगुमाँ है.
यह
क्या माजरा है, यह कैसी सबा है.
चले
पोछने सबके आंसू, भारत के रतन थे.
मिली
राह में जब सुबह की किरण.
सुबह
ने दिखाया धनो का द्वार.
रहबर
बन गए रहज़न, बे-शुमार.
मुश्ल्किलें
तो बहुत हैं, पै इरादे जवानां
बुलंद.
यही
है बस हिन्दोस्तान का मरम.
पै, अब तो मंज़र ये है, हिन्दोस्तां बदगुमाँ है.
यह
क्या माजरा है, यह कैसी सबा है.
यह मोदी की हवा है, य राहुल की सदा है.
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